एक प्रश्न है यक्ष ही समझ लीजिए
जन्म से लेकर वर्तमान तक
हम अपने ख्वाबों के पुलिन्दे लेकर
यहाँ से वहाँ भटक रहे है
सांसो का बोझ लेकर जीवित है
कोई ख्वाब की उड़ान गर पूरी हो
तो जीवन का उद्देश्य ही सफल हो जाये
घर से निकलते ही मंजिल मिल जाये
किसी घोर निराशा सी जो कही जाती नहीं
वक्त के थपेड़ो के साथ
मैं भी चल पड़ी
किसी इरादे के साथ
जन्म से लेकर वर्तमान तक
हम अपने ख्वाबों के पुलिन्दे लेकर
यहाँ से वहाँ भटक रहे है
सांसो का बोझ लेकर जीवित है
कोई ख्वाब की उड़ान गर पूरी हो
तो जीवन का उद्देश्य ही सफल हो जाये
घर से निकलते ही मंजिल मिल जाये
किसी घोर निराशा सी जो कही जाती नहीं
वक्त के थपेड़ो के साथ
मैं भी चल पड़ी
किसी इरादे के साथ

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